क्यों इंडिया आज तक अपना खुद का Smartphone नहीं बना पाया? सच्चाई जानकर चौंक जाओगे!

India Smartphone Manufacturing: Future

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क्या इंडिया खुद का स्मार्टफोन बना सकता है — processor से लेकर display तक? सवाल सिंपल है लेकिन जवाब थोड़ा complex है। आज भी मार्केट में जितने भी फोन्स बिक रहे हैं, उनमें से ज़्यादातर Chinese या American technology पर डिपेंड हैं। हमारे पास assembling units हैं, manpower है, लेकिन core components जैसे processor, RAM, display और OS (Android/iOS) हम बाहर से import करते हैं। यानी जो हम Made in India बोलते हैं, असल में वो Assembled in India होता है।


India

India का टेक जर्नी – कहां तक पहुंच चूके हम

1947 में आज़ादी के बाद इंडिया का फोकस poverty और basic infrastructure पर था। 1960s में एक मौका आया जब American कंपनी Fairchild Semiconductors इंडिया में chip unit खोलना चाहती थी। लेकिन slow policies और government support की कमी की वजह से वो प्रोजेक्ट कभी शुरू नहीं हुआ। वो कंपनी बाद में Intel बनी — आज की सबसे बड़ी chipmaker। अगर वो उस वक्त इंडिया में set होती, तो आज कहानी कुछ और होती।


SCL की कहानी – एक खोया हुआ मौका

1972 में सरकार ने Semiconductor Complex Limited (SCL) शुरू की। 12 साल लगे setup में, लेकिन 1980 तक इंडिया 800nm chips बना रहा था — global level से सिर्फ 2 साल पीछे। फिर 1989 में SCL के Mohali प्लांट में आग लग गई, और 60 करोड़ का नुकसान हुआ। आग की वजह आज तक mystery है। सरकार को दोबारा rebuild करने में 8 साल लगे, और यहीं से इंडिया सेमीकंडक्टर रेस में पीछे रह गया।


Taiwan से सीख – Vision mattered

उसी समय Taiwan ने अपनी company ITRI को support दिया, जिससे TSMC बनी। आज TSMC 3nm chips बनाती है — दुनिया की सबसे advanced technology। जबकि इंडिया की SCL अभी भी 180nm chips बना रही है। यानी vision और speed ही असली फर्क था।


आज की सिचुएशन – Assembling hub बन गया इंडिया

आज almost हर बड़ा brand जैसे Samsung, Apple, Vivo, Oppo, Xiaomi अपनी manufacturing इंडिया में करता है — लेकिन सिर्फ assembling होती है। Components बाहर से आते हैं और इंडिया में assemble किए जाते हैं। इससे jobs और economy को फायदा होता है, लेकिन innovation और R&D almost zero रहती है।

हर साल 15 लाख engineers ग्रेजुएट होते हैं, लेकिन top talent विदेशों में settle हो जाता है। इसे Brain Drain कहा जाता है। जिन्हें हम अपने देश में innovate करने के लिए groom कर सकते थे, वो Apple, Google और Microsoft को grow कर रहे हैं।


R&D – सबसे बड़ी कमजोरी

इंडिया अपने GDP का 1% से भी कम R&D में खर्च करता है, जबकि अमेरिका और चीन 3–4% तक invest करते हैं।Technology build करने के लिए long-term investment चाहिए। अगर आज से भी शुरुआत करें, तो इंडिया को कम से कम 10–15 साल लगेंगे world-class processor बनाने में।


Future Bright है – Change शुरू हो चुका है

अब सरकार ने finally टेक पर ध्यान देना शुरू किया है। 2021 में launch हुआ India Semiconductor Mission (ISM), जिसके लिए ₹76,000 करोड़ का budget रखा गया। Tata Group भी गुजरात में ₹91,000 करोड़ का semiconductor fab unit बना रहा है। कुल मिलाकर लगभग $18 billion के प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं।

इंडिया ने अपनी खुद की Vikram chip बनाई है, जो 32-bit architecture पर based है और commercial products में use हो रही है। अभी focus 28nm से 110nm chips पर है — जो global demand में हैं और practical start माना जा रहा है।

साथ ही ARM जैसी बड़ी company ने Bengaluru में design center शुरू किया है, जहां future में 2nm level chips design होंगी।


Software Front पर भी Progress

Hardware के साथ software में भी इंडियन कंपनियां आगे बढ़ रही हैं। जैसे Zoho, जो अब Microsoft जैसी global companies को challenge कर रही है। Zoho apps अब कई government departments में use हो रही हैं। उनका app Arattai (WhatsApp Alternative) भी काफी popular हुआ है।

ये दिखाता है कि इंडिया धीरे-धीरे self-reliant tech ecosystem की तरफ बढ़ रहा है।


Conclusion

इंडिया का smartphone manufacturing अभी transition stage में है। हम assembling से आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन innovation तक पहुंचने में time लगेगा।

अगर हम R&D, innovation और brain-drain control पर focus करें, तो अगले 10–15 सालों में इंडिया अपने खुद के smartphone और processor बना पाएगा। Talent हमारे पास है, बस vision और consistency की जरूरत है।

 

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