झारखंड बिहार से क्यों अलग हुआ? पूरी कहानी आसान भाषा में एलएम
अगर आज आप मैप देखेंगे तो झारखंड और बिहार दो अलग-अलग राज्य देखने को मिलता हैं। लेकिन हर लेकिन हर किसी को नहीं पता कि झारखंड पहले बिहार का हिस्सा था। और 15 नवंबर 2000 को इसे अलग कर नया राज्य बनाया गया।
अब सभी के दिमाग में सबसे बड़ा सवाल यही आता है की – आखिर झारखंड को अलग क्यों करना पड़ा? क्या वजह थी कि लोग इतने सालों तक आंदोलन करते रहे?
चलिए इसे पूरे अच्छे से समझते है पूरे आसान भाषा में step by step.

झारखंड की अपनी पहचान
झारखंड का इलाका हमेशा से अलग तरह का रहा है। यहाँ पहाड़, जंगल और ढेर सारे खनिज हैं। यहाँ ज़्यादातर आदिवासी समुदाय रहते थे – मुंडा, उरांव, संथाल, हो और कई दूसरे।
इनकी अपनी भाषा रही है,अपने त्योहार और अपनी परंपराएँ हैं। बिहार के मैदानी इलाकों से इनका लाइफस्टाइल बिल्कुल अलग था।
झारखंड के लोगों को लगता था कि बिहार की राजनीति में उनकी आवाज दबाई जा रही थी। जैसे – उनकी संस्कृति को कोई महत्व नहीं दी जाती थी।
झारखंड में खज़ाना था, लेकिन फायदा नहीं
अगर आप resources की बात करें तो झारखंड को खज़ाने की भूमि कहना गलत नहीं होगा। यहाँ मिलता है –
कोयला, लोहा, बॉक्साइट, यूरेनियम – सब कुछ है।
देश के बड़े-बड़े बिजलीघर और स्टील इंडस्ट्रीज झारखंड के खनिजों पर चलती थी।
लेकिन मजेदार बात यह थी कि इन सबका फायदा बिहार की राजधानी पटना और बाकी इलाकों को ज्यादा मिलता था।
स्थानीय लोग वहीं गरीबी, बेरोज़गारी और अशिक्षा से जूझते रहते थे।
लोगों की सबसे बड़ी शिकायत यही थी –
हमारे इलाके से कोयला निकल रहा है, हमारे जंगल कट रहे हैं, हमारी जमीन ली जा रही है, लेकिन हमें ही इसका फायदा नहीं मिल रहा ।
जमीन और माहौल भी अलग
बिहार का मैदान खेती-किसानी के लिए बिल्कुल परफेक्ट था।
लेकिन झारखंड पहाड़ी और जंगलों से भरा हुआ। यहाँ खेती उतनी आसान नहीं थी, लेकिन खनिज भरपूर थे।
दोनों इलाकों की ज़रूरतें अलग थीं –
• बिहार को चाहिए था खेती का समर्थन।
• झारखंड को चाहिए था खनन, जंगल और उद्योग पर सही नीति।
यानी प्रशासनिक और विकास की दृष्टि से दोनों को एक साथ संभालना मुश्किल हो रहा था।

झारखंड आंदोलन: लंबे संघर्ष की कहानी
अब आते हैं उस असली हिस्से पर, कैसे लोग अलग राज्य की मांग करने लगे।
• 1930 के दशक में जयपाल सिंह मुंडा ने झारखंड पार्टी बनाई। उनका कहना था कि झारखंड की संस्कृति और लोगों को सुरक्षित रखने के लिए इसे अलग राज्य बनना चाहिए।
• बाद में शिबू सोरेन और उनकी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इस आंदोलन को और ताकत दी।
• जगह-जगह आंदोलन, धरना और विरोध हुए।
• कई बार रेल रोको आंदोलन, बंद और बड़ी रैलियाँ भी हुईं।
• यह मांग धीरे-धीरे इतनी बड़ी हो गई कि अब इसे नज़रअंदाज़ करना नामुमकिन हो गया।
राजनीति और केंद्र की मजबूरी
1990 के दशक में भारत में गठबंधन सरकारों का दौर चल रहा था। मतलब दिल्ली की सरकारें स्थिर नहीं थीं और उन्हें क्षेत्रीय पार्टियों का सपोर्ट चाहिए था।
झारखंडी नेताओं ने यही मौका पकड़ लिया।
उन्होंने साफ कहा – अगर हमारी मांग पूरी नहीं हुई तो हम समर्थन नहीं देंगे।
केंद्र सरकार भी झारखंड के नेताओं को नाराज़ नहीं करना चाहती थी।
इसलिए आखिरकार झारखंड को अलग करने का फैसला हो गया।
झारखंड राज्य का जन्म
15 नवंबर 2000 को, बिरसा मुंडा की जयंती के दिन, झारखंड को आधिकारिक तौर पर बिहार से अलग कर दिया गया।
रांची को इसकी राजधानी बनाया गया। और भारत को मिला नया राज्य – झारखंड, जो देश का 28वाँ राज्य बना।
यह दिन झारखंड के लोगों के लिए बहुत खास था। क्योंकि यह सिर्फ एक तारीख नहीं थी, बल्कि उनके संघर्ष की जीत थी।
झारखंड बनने के बाद क्या बदला?
अब सवाल आता है – अलग राज्य बनने के बाद आखिर क्या फर्क पड़ा?
1. पहचान और गर्व
लोगों को अपनी अलग पहचान मिली। आदिवासी संस्कृति और भाषा को ज्यादा महत्व मिलने लगा।
2. संसाधनों पर थोड़ा नियंत्रण
खनिज और जंगलों पर अब राज्य सरकार का नियंत्रण आया। कंपनियाँ और उद्योग झारखंड में ज्यादा निवेश करने लगीं।
3. शिक्षा और रोजगार
धीरे-धीरे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ बेहतर हुईं। रांची और अन्य शहरों में कॉलेज, यूनिवर्सिटी और हॉस्पिटल बढ़े।
4. लेकिन चुनौतियाँ भी बरकरार
हालाँकि सबकुछ आसान नहीं था।
• भ्रष्टाचार ने कई बार विकास को रोक दिया।
• बेरोज़गारी अब भी बड़ी समस्या रही।
• नक्सलवाद ने भी राज्य को काफी नुकसान पहुँचाया।
झारखंड से सीख
झारखंड की कहानी हमें यह सिखाती है कि अगर किसी इलाके की पहचान और उसके लोगों की जरूरतों को नज़रअंदाज़ किया जाए, तो वहाँ असंतोष बढ़ता है।
लोग अपनी संस्कृति और संसाधनों पर अधिकार चाहते हैं। और अगर उन्हें यह नहीं मिलता, तो वे लड़ाई लड़ते हैं।
झारखंड इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
नतीजा
तो दोस्तों, झारखंड का बिहार से अलग होना सिर्फ राजनीतिक फैसला नहीं था। यह लोगों की पहचान, उनके हक और उनके विकास की लड़ाई थी।
लंबे आंदोलन और संघर्ष के बाद आखिरकार झारखंड बना और आज यह राज्य अपने खनिज, जंगल और संस्कृति के साथ भारत के विकास
में बड़ा योगदान दे रहा है।
हाँ, चुनौतियाँ अभी भी हैं – लेकिन यह राज्य अपनी पहचान और सपनों के साथ आगे बढ़ रहा है।
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