Paytm की वापसी की कहानी: बर्बादी से 300% स्टॉक उछाल और ₹123 करोड़ का प्रॉफिट तक का सफर

Paytm भारत की सबसे चर्चित फिनटेक कंपनियों में से एक है। कभी इसने डिजिटल पेमेंट की दिशा ही बदल दी थी, लेकिन कुछ सालों में हालात इतने बुरे हो गये थे कि कंपनी लगभग खत्म होने के कगार पर पहुंच गई थी।
स्टॉक 82% टूट गया, IPO फेल हो गया, Paytm Mall बंद हुआ और RBI ने बैंकिंग पर रोक लगा दी। लेकिन 2025 में Paytm ने सबको चौंका दिया — 15 महीनों में स्टॉक 300% उछाल हुआ और कंपनी ने पहली बार ₹123 करोड़ का नेट प्रॉफिट किया।
आइए जानते हैं Paytm के इस पूरे सफर को — कैसे यह कंपनी बनी, क्यों गिरी और फिर इतनी बड़ी वापसी कैसे की
1. Paytm की शुरुआत और सपना
साल 2000 में विजय शेखर शर्मा ने 197 Communications शुरू की। उस समय इंटरनेट नया था और वे मोबाइल रिंगटोन व न्यूज जैसी छोटी सेवाएं चला रहे थे।
विजय शर्मा का सपना था कि जैसे चीन में Alipay ने मोबाइल पेमेंट्स से क्रांति लाई, वैसा ही भारत में भी हो।
2010 में उन्होंने Paytm लॉन्च किया। शुरुआत में Paytm केवल मोबाइल रिचार्ज और बिल पेमेंट्स के लिए इस्तेमाल होता था। धीरे-धीरे लोगों ने इसे अपनाना शुरू किया।
2. कैशबैक और नोटबंदी से तेज़ ग्रोथ
Paytm ने एक स्ट्रेटेजी अपनाई जिसने गेम ही बदल दिया — कैशबैक।
यूज़र्स को हर रिचार्ज या पेमेंट पर कुछ रुपए वापस मिलने लगे।दुकानदारों को QR कोड और मशीनें फ्री दी गईं।
8 नवंबर 2016 को जब नोटबंदी हुई, लोगों के पास कैश खत्म हो गया और ATM खाली थे। Paytm ने तरकीब निकाला— अब ATM नहीं, Paytm करो।
लोगों ने तेजी से Paytm अपनाना शुरू कर दिया। 3 महीने में वॉलेट यूज़र 125 मिलियन से 185 मिलियन हो गए। 2019 तक Paytm के 450 मिलियन से ज्यादा यूज़र्स हो चुके थे।
3. UPI और बिज़नेस मिस्टेक्स से गिरावट
नोटबंदी के समय Paytm टॉप पर था, लेकिन इसी दौरान 2016 में UPI आया। शुरुआत में Paytm को लगा कि लोग आसानी से सिस्टम नहीं बदलेंगे, लेकिन UPI ने पेमेंट्स को बहुत आसान बना दिया
बार-बार वॉलेट लोड करने की जरूरत खत्म हुई
डायरेक्ट बैंक टू बैंक ट्रांसफर से समय और चार्ज दोनों बचे
PhonePe और Google Pay ने UPI को तेजी से बढ़ाया। उनका UI सिंपल और भरोसेमंद था। धीरे-धीरे Paytm का यूज़र बेस घटने लगा।
इसी बीच Paytm ने Paytm Mall लॉन्च किया, Flipkart–Amazon को टक्कर देने के लिए। लेकिन लॉजिस्टिक्स कमजोर थी, डिलीवरी लेट होती थी और फ्रॉड के मामले बढ़ गए। ट्रस्ट घटा और Paytm Mall फ्लॉप हो गया। बाद में यह बंद करना पड़ा।
4. IPO फेलियर और RBI बैन
2021 में Paytm ने भारत का सबसे बड़ा IPO लॉन्च किया। उम्मीद थी कि ये ऐतिहासिक लिस्टिंग होगी, लेकिन शेयर इश्यू प्राइस से 27% नीचे खुला। कंपनी के पास कई बिज़नेस थे लेकिन फोकस क्लियर नहीं था। रेवेन्यू बढ़ रहा था पर प्रॉफिट नहीं दिख रहा था।
जनवरी 2024 में RBI ने Paytm Payments Bank में नियम तोड़ने के कारण बैन लगा दिया। कई अकाउंट्स में KYC पूरी नहीं थी और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने वाले नियमों का पालन ठीक से नहीं हो रहा था। इस खबर से मार्केट में पैनिक फैल गया और शेयर ₹761 से ₹341 तक गिर गया।
5. टर्नअराउंड की शुरुआत: Cost Cutting और फोकस
बैन के बाद Paytm ने तेजी से कदम उठाए —
NPCI से थर्ड पार्टी UPI लाइसेंस लिया और Yes Bank व Axis Bank जैसे पार्टनर्स के साथ tie-up किया ताकि QR पेमेंट्स चालू रहें।
Merchant ecosystem को बिना QR कोड बदले नए बैंक से जोड़ दिया।
Employee cost में 30% कटौती की, non-core डिपार्टमेंट्स में layoffs हुए।
Fraud detection में AI टूल्स लगाए और कस्टमर सपोर्ट को chatbot से ऑटोमेट किया।
Paytm Mall और ticketing बिज़नेस को बेचकर core payments पर फोकस किया।
Alibaba और Ant Financial ने Paytm से exit किया, जिससे regulatory trust वापस बना।
6. 2025 में Paytm की वापसी
Paytm ने अपने core बिज़नेस — payments और merchant services — पर पूरी ताकत लगाई। 2025 तक 1.3 करोड़ से ज्यादा साउंड बॉक्स लगाए जा चुके थे। इन पर मंथली सब्सक्रिप्शन से कंपनी को लगातार रेवेन्यू मिला।
Loan distribution में Paytm ने खुद पैसा देने की बजाय बैंकों व NBFC से पार्टनरशिप की। इससे रेवेन्यू बढ़ा लेकिन क्रेडिट रिस्क नहीं आया।
2025 के पहले क्वार्टर में Paytm ने इतिहास में पहली बार ₹123 करोड़ का नेट प्रॉफिट दिखाया। स्टॉक 15 महीनों में ₹310 से ₹1250 तक पहुंच गया — यानी 300% की जबरदस्त तेजी बढ़ी।
7. आगे की राह — असली टेस्ट बाकी है
Paytm ने शानदार वापसी की है, लेकिन असली चुनौती अब है —
UPI मार्केट पहले से ज्यादा कॉम्पिटिटिव है। PhonePe और GPay के पास बड़ा यूज़र बेस है।
Paytm को लगातार प्रॉफिट और ग्रोथ दिखानी होगी। सिर्फ cost cutting काफी नहीं।
रेगुलेटरी कंप्लायंस में कोई गलती कंपनी को फिर से नुकसान पहुंचा सकती है।
अगर Paytm आने वाले कुछ सालों में लगातार अच्छा प्रदर्शन दिखाता है तो ये वापसी लंबी दौड़ का गेम चेंजर साबित हो सकती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
Paytm की कहानी बताती है कि बिज़नेस में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं।
2016 में Paytm तेजी से उभरा, 2018–2024 में बड़ी गिरावट देखी और 2025 में फिर मजबूत वापसी की।
कंपनी ने गलतियों से सीखा, खर्च घटाया, core पर फोकस किया और रेगुलेटरी भरोसा वापस पाया। अब देखना होगा कि आने वाले सालों में Paytm खुद को PhonePe और Google Pay जैसे दिग्गजों के बीच कैसे टिकाता है।
Disclaimer:
यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दी गई किसी भी बात को निवेश सलाह के
रूप में न लें। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।
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